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स्याम तव मूरति ह्रदय समान...

श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार - स्याम तव मूरति ह्रदय समान...

श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दारके परमोपयोगी सरस पदोंसे की गयी भक्ति भगवान को परम प्रिय है।

स्याम तव मूरति ह्रदय समानी ।

अँग-अँग ब्यापी रग-रग राँची, रोम-रोम उरझानी ॥

जित देखौं तित तू ही दीखत, दृष्टि कहा बौरानेई ।

स्त्रवन सुनत नित ही बंसीधुनि, देह रही लपटानी ॥

स्याम-अंग सुचि सौरभ, मीठी, नासा तेहि रति मानी ।

जिभ्या सरस मनोहर मधुमय, हरि जूठन रस खानी ॥

ऊधौ कहत सँदेस तिहारो, हमहिं बनावत ग्यानी ।

कहु थल जहाँ ग्यानकों राखें, कहा मसखरी ठानी ॥

निकसत नाहिम ह्रदयतें हमरे बैठ्यो रहत लुकानी ।

ऊधौ ! स्याम न छाड़त हमको, करत सदा मनमानी ॥

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Last Updated : September 25, 2008

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