संस्कृत सूची|संस्कृत स्तोत्र साहित्य|अष्टोत्तरशतनामस्तोत्र| श्रीगुरुवायुपुरेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्ररत्नम् अष्टोत्तरशतनामस्तोत्र श्री हयग्रीवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्री आञ्जनेय अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् तुलस्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं नृसिंहाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् सरस्वत्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् गौर्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्री वेङ्कटेशाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ललिताष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् सुब्रह्मण्याष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनाम्स्तोत्रम् श्रीरामाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीगणेशाष्टोत्तरशतनाम्स्तोत्रम् श्री सीता अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्री सुदर्शनाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रं सहस्रशीर्ष्णे वै तुभ्यं स... गणेशहेरंबगजाननेति महोदर! ... श्री देव्युवाच- देव देव म... श्रीशंकराचार्यवर्यश्च ब्र... महाशास्ता महादेवो महादेवस... रजताचलशृंगाग्रमध्यस्थायै ... वासुदेवं हृषीकेशं वामनं ज... अग्नेः अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीअङ्गारकाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् अन्नपूर्णा अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीअन्नपूर्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् अर्धनारीश्वर्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् अवलोकितेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् आकाशगर्भनामाष्टोत्तरशतस्तोत्रम् श्रीमदानन्दनटराजाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् बटुकभैरवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् आर्यताराष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् आर्यमञ्जुश्रीनामाष्टोत्तरशतकस्तोत्रम् इन्दिराष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् उमाऽष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् कालीशतनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥ श्रीकमलाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् कार्तिकेयशताष्टनामस्तोत्रम् श्रीकार्तिकेयाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् आद्या कालिकादेव्याः शतनामस्तोत्रम् कालिकाशतनामस्तोत्रम् श्रीकालीशतनामस्तोत्रम् कालीशतनामस्तोत्रम् श्रीकिरातशास्तुः अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीकेतु अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीगङ्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीगणपतिगकाराष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीगणेशाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् गणेशाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीगरुडाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीगायत्र्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् गीतासारगुर्वष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीगुरुवातपुराधीशाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीगुरुवायुपुरेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्ररत्नम् श्रीगुर्वाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीगोकुलेशाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीगोदाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीगोदाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीगौराङ्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् गौरीपतिशतनामस्तोत्रम् गौर्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीचन्द्राष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीचन्द्राष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीचामुण्डेश्वरी अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीछिन्नमस्ताष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीजानकी अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीकृष्णोक्त झिल्लिरास्तोत्रम् श्रीताराशतनामस्तोत्रम् ताराशतनामस्तोत्रम् श्रीताराशतनामस्तोत्रम् दत्तात्रेयाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीदत्तात्रेयाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् दकारादिदत्तात्रेयाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीकल्क्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ककारादि श्रीकूर्माष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीनरसिंहाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीबुद्धाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीमत्स्याष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीपरशुरामाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीरामाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीवराहाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीवामनाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीवामनाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीदक्षिणामूर्ति अष्टोत्तरशतनामस्तोत्र श्रीदक्षिणामूर्त्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् देवीवैभवाश्चर्याष्टोत्तरशतदिव्यनामस्तोत्रम् श्रीधन्वन्तर्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीधर्मशास्तुः अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीधूमावत्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् नारायणाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् नित्यानन्दाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीनिम्बार्काष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीनृसिंहगिरिमहामण्डलेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीनृसिंहाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीनृसिंहाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् पकारादि श्रीपरशुरामाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीपार्थसारथ्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीपार्थसारथ्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीपार्वत्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीपीताम्बराष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीवृन्दावनेश्वर्या अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं श्रीबगलाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीबगलाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीबगलाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीबटुकभैरवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीबटुकभैरवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् बटुकभैरवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं श्रीबालाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् १ श्रीबालात्रिपुरसुन्दर्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् २ श्रीबालाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ३ श्रीबालाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ४ श्रीबालाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ५ बिल्वाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीबुधाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीभद्रकाल्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीभुवनेश्वर्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीभुवनेश्वर्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीभुवनेश्वर्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीभैरव्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् भैरव्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् मन्त्रसिद्धिप्रदमहादुर्गाशतनामस्तोत्रम् श्रीमहाकालककाराद्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् महाचक्रवर्तिनामाष्टोत्तरशतस्तोत्रम् महात्रिपुरसुन्दर्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् माणिक्यवाचकाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीमातङ्गीशतनामस्तोत्रम् मातङ्ग्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीरङ्गनाथाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीराघवेन्द्राष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीराधाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीराधिकाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् रामनामाष्टोत्तरशतरामायणम् रामानुजाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीरामाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् रामाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीरामाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीरामाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीराहु अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीरेणुका अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीललिताम्बिका दिव्याष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीललितालकारादिशतनामस्तोत्रम् श्रीलक्ष्मीचन्द्रलाम्बाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीलक्ष्मीनारायणाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् लक्ष्मीनृसिंहाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीलक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीलक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् कृष्णलीलाशतनामस्तोत्रम् वज्रपाणिनामाष्टोत्तरशतस्तोत्रम् श्रीवराहाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् वसुधारानामधारणीस्तोत्रम् श्रीवासवीकन्यकापरमेश्वर्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीविघ्नेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीविठ्ठलाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीविद्यागणेशाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीविद्यारण्याष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् विश्वकर्मनामाष्टोत्तरशतकम् श्रीविष्णोरकाराद्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीविष्णोरष्टोत्तरशतदिव्यस्थानीयनामस्तोत्रम् श्रीविष्णोरष्टोत्तरशतदिव्यस्थानीयनामस्तोत्रम् श्रीवेङ्कटेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीवेदव्यासाष्टोत्तरनामस्तोत्रम् श्रीमद्वेदान्तदेशिकाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् व्यासाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीशङ्कराचार्याष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीशनि अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीनृसिंहकृत शरभस्तोत्रम् शरभेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीशिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीशिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् शिवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीशुक्राष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् शोणाचलशिवनामस्तोत्रम् श्रीश्यामदेवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीषोडशीशतनामस्तोत्रम् श्रीसन्तोषीमातुरष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीसरस्वत्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीसीताष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् सीताष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्री सीता अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीसुदर्शनाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् सुब्रह्मण्यषडक्षराष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीसुब्रह्मण्याष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीसूर्याष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीसूर्याष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् सूर्याष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं सूर्याष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् सौभाग्याष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् स्कन्दशताष्टनामस्तोत्रम् स्कन्दाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीहनुमदष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीहनुमदष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् हनुमदष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीहनुमदष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् हनुमदष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीहनुमदष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीहनुमदष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीहनुमदष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीहनुमदष्टोत्तरशतनामस्तोत्रनामावलिः श्रीहनुमदष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीहयग्रीवाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीहरिहरपुत्राष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् हरिहराष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् श्रीगुरुवायुपुरेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्ररत्नम् अष्टोत्तरशतनामस्तोत्र म्हणजे देवी देवतांची एकशे आठ नावे.Ashtottara shatanamavali means 108 names of almighty God and Godess. Tags : ashtottar shatnam stotradevidevtasanskritstotraसंस्कृतस्तोत्र श्रीगुरुवायुपुरेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्ररत्नम् Translation - भाषांतर श्रीविद्याराजगोपालाभिधश्रीमहावैकुण्ठेश्वरस्वरूपश्रीगुरुवायुपुरेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्ररत्नम् ॥पार्वत्युवाच -देवदेव महादेव महावैष्णवतल्लज ।जीववातपुरेशस्य माहात्म्यमखिलं त्वया ॥१॥मन्त्रतन्त्ररहस्याढ्यैः सहस्राधिकनामभिः ।अद्य मे प्रेमभारेणोपन्यस्तमिदमद्भुतम् ॥२॥महावैकुण्ठनाथस्य प्रभावमखिलं प्रभो ।सङ्ग्रहेण श्रोतुमद्य त्वरायुक्तास्म्यहं प्रभो ॥३॥यस्य श्रवणमात्रेण जीववृन्देषु सर्वतः ।नातिकृच्छ्रेण यत्नेन लसेयुः सर्वसिद्धयः ॥४॥तादृशं सुलभं स्तोत्रं श्रोतुमिच्छामि त्वन्मुखात् ।ईश्वर उवाच -महादेवि शिवे भद्रे जीववातपुरेशितुः ॥५॥माहात्म्यवारिधौ मग्नः पूरयामि त्वदीप्सितम् ।पूर्वं यन्नामसाहस्रं तस्य देवस्य भाषितम् ॥६॥तस्यादौ विजृम्भमाणैरष्टाधिकशतेन तु ।नामभिर्निर्मितं स्तोत्रं सर्वसिद्धिविधायकम् ॥७॥पठितुं नामसाहस्रं अशक्ताः सन्ति ये शिवे ।तेषामर्थे स्तोत्रमेतत्सङ्गृहीतं फलप्रदम् ॥८॥अनुकूलौ देशकालौ यस्य स्तो जगतीह तु ।पठितव्यं तेन नामसाहस्रं यत्नतः शिवे ॥९॥आलस्यदूषिते चित्ते विश्वासरहिते तथा ।गुरुवातपुरेशस्य न हि मूर्तिः प्रसीदति ॥१०॥गुरोरन्यत्र विश्वासी तथा वातपुरेशितुः ।कथमेतत्फलं प्रोक्तं यथावदधिगच्छति ॥११॥एक एव गुरुर्यस्य वैकुण्ठो यस्य दैवतम् ।तस्य भक्तस्य नूनं हि स्तोत्रमेतत्फलिष्यति ॥१२॥अद्य ते देवि वक्ष्यामि नाम्नामष्टोत्तरं शतम् ।स्तोत्रराजमिमं पुण्यं सावधानमनाः शृणु ॥१३॥स्तोत्रस्यास्य ऋषिः प्रोक्तो दक्षिणामूर्तिरीश्वरः ।छन्दोऽनुष्टुप् तथा देवो गुरुवायुपुरेश्वरः ॥१४॥रमाशक्तिस्मरैर्बीजैः बीजशक्ती च कीलकम् ।धर्मार्थकाममोक्षेषु विनियोगः प्रकीर्तितः ॥१५॥मूलमन्त्रस्य षड्भागैः कराङ्गन्यासमाचरेत् ।महावैकुण्ठरूपेण ध्यातव्यात्र हि देवता ॥१६॥इन्द्रनीलसमच्छायं पीताम्बरधरं हरिम् ।शङ्खचक्रगदापद्मैर्लसद्बाहुं विचिन्तयेत् ॥१७॥ध्यानम् -क्षीराम्भोधिस्थकल्पद्रुमवनविलसद्रत्नयुङ्मण्टपान्तःशङ्खं चक्रं प्रसूनं कुसुमशरचयं चेक्षुकोदण्डपाशौ ।हस्ताग्रैर्धारयन्तं सृणिमपि च गदां भूरमाऽऽलिङ्गितं तंध्यायेत्सिन्दूरकान्तिं विधिमुखविबुधैरीड्यमानं मुकुन्दम् ॥अथ अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ।महावैकुण्ठनाथाख्यो महानारायणाभिधः ।तारश्रीशक्तिकन्दर्पचतुर्बीजकशोभितः ॥१९॥गोपालसुन्दरीरूपः श्रीविद्यामन्त्रविग्रहः ।रमाबीजसमारम्भो हृल्लेखासमलङ्कृतः ॥२०॥मारबीजसमायुक्तो वाणीबीजसमन्वितः ।पराबीजसमाराध्यो मीनकेतनबीजकः ॥२१॥तारशक्तिरमायुक्तः कृष्णायपदपूजितः ।कादिविद्याद्यकूटाढ्यो गोविन्दायपदप्रियः ॥२२॥कामराजाख्यकूटेशो गोपीजनसुभाषितः ।वल्लभायपदप्रीतः शक्तिकूटविजृम्भितः ॥२३॥वह्निजायासमायुक्तः परावाङ्मदनप्रियः ।मायारमासुसम्पूर्णो मन्त्रराजकलेवरः ॥२४॥द्वादशावृतिचक्रेशो यन्त्रराजशरीरकः ।पिण्डगोपालबीजाढ्यः सर्वमोहनचक्रगः ॥२५॥षडक्षरीमन्त्ररूपो मन्त्रात्मरसकोणगः ।पञ्चाङ्गकमनुप्रीतः सन्धिचक्रसमर्चितः ॥२६॥अष्टाक्षरीमन्त्ररूपो महिष्यष्टकसेवितः ।षोडशाक्षरमन्त्रात्मा कलानिधिकलार्चितः ॥२७॥अष्टादशाक्षरीरूपोऽष्टादशदलपूजितः ।चतुर्विंशतिवर्णात्मगायत्रीमनुसेवितः ॥२८॥चतुर्विंशतिनामात्मशक्तिवृन्दनिषेवितः ।क्लीङ्कारबीजमध्यस्थः कामवीथीप्रपूजितः ॥२९॥द्वात्रिंशदक्षरारूढो द्वात्रिंशद्भक्तसेवितः ।पिण्डगोपालमध्यस्थः पिण्डगोपालवीथिगः ॥३०॥वर्णमालास्वरूपाढ्यो मातृकावीथिमध्यगः ।पाशाङ्कुशद्विबीजस्थः शक्तिपाशस्वरूपकः ॥३१॥पाशाङ्कुशीयचक्रेशो देवेन्द्रादिप्रपूजितः ।लिखितो भूर्जपत्रादौ क्रमाराधितवैभवः ॥३२॥ऊर्ध्वरेखासमायुक्तो निम्नरेखाप्रतिष्ठितः ।सम्पूर्णमेरुरूपेण सम्पूजितोऽखिलप्रदः ॥३३मन्त्रात्मवर्णमालाभिः सम्यक्शोभितचक्रराट् ।श्रीचक्रबिन्दुमध्यस्थयन्त्रसंराट्स्वरूपकः ॥३४॥कामधर्मार्थर्फलदः शत्रुदस्युनिवारकः ।कीर्तिकान्तिधनारोग्यरक्षाश्रीविजयप्रदः ॥३५॥पुत्रपौत्रप्रदः सर्वभूतवेतालनाशनःकासापस्मारकुष्ठादिसर्वरोगविनाशकः ॥३६॥त्वगादिधातुसम्बद्धसर्वामयचिकित्सकः ।डाकिन्यादिस्वरूपेण सप्तधातुषु निष्ठितः ॥३७॥स्मृतिमात्रेणाष्टलक्ष्मीविश्राणनविशारदः ।श्रुतिमौलिसमाराध्यमहापादुकलेवरः ॥३८॥महापदावनीमध्यरमादिषोडशीद्विकः ।रमादिषोडशीयुक्तराजगोपद्वयान्वितः ॥३९॥श्रीराजगोपमध्यस्थमहानारायणद्विकः ।नारायणद्वयालीढमहानृसिंहरूपकः ॥४०॥लघुरूपमहापादुः महामहासुपादुकः ।महापदावनीध्यानसर्वसिद्धिविलासकः ॥४१॥महापदावनीन्यासशताधिककलाष्टकः ।परमानन्दलहरीसमारब्धकलान्वितः ॥४२॥शताधिककलान्तोद्यच्छ्रीमच्चरणवैभवः ।शिर-आदिब्रह्मरन्ध्रस्थानन्यस्तकलावलिः ॥४३॥इन्द्रनीलसमच्छायः सूर्यस्पर्धिकिरीटकः ।अष्टमीचन्द्रविभ्राजदलिकस्थलशोभितः ॥४४॥कस्तूरीतिलकोद्भासी कारुण्याकुलनेत्रकः ।मन्दहासमनोहारी नवचम्पकनासिकः ॥४५॥मकरकुण्डलद्वन्द्वसंशोभितकपोलकः ।श्रीवत्साङ्कितवक्षःश्रीः वनमालाविराजितः ॥४६॥दक्षिणोरः प्रदेशस्थपराहङ्कृतिराजितः ।आकाशवत्क्रशिष्ठश्रीमध्यवल्लीविराजितः ॥४७॥शङ्खचक्रगदापद्मसंराजितचतुर्भुजः ।केयूराङ्गदभूषाढ्यः कङ्कणालिमनोहरः ॥४८॥नवरत्नप्रभापुञ्जच्छुरिताङ्गुलिभूषणः ।गुल्फावधिकसंशोभिपीतचेलप्रभान्वितः ॥४९॥किङ्किणीनादसंराजत्काञ्चीभूषणशोभितः ।विश्वक्षोभकरश्रीकमसृणोरुद्वयान्वितः ॥५०॥इन्द्रनीलाश्मनिष्पन्नसम्पुटाकृतिजानुकः ।स्मरतूणाभलक्ष्मीकजङ्घाद्वयविराजितः ॥५१॥मांसलगुल्फलक्ष्मीको महासौभाग्यसंयुतः ।ह्रींङ्कारतत्त्वसम्बोधिनूपुरद्वयराजितः ॥५२॥आदिकूर्मावतारश्रीजयिष्णुप्रपदान्वितः ।नमज्जनतमोवृन्दविध्वंसकपदद्वयः ॥५३॥नखज्योत्स्नालिशैशिर्यपरविद्याप्रकाशकः ।रक्तशुक्लप्रभामिश्रपादुकाद्वयवैभवः ॥५४॥दयागुणमहावार्धिर्गुरुवायुपुरेश्वरः ।फलश्रुतिः -इत्येवं कथितं देवि नाम्नामष्टोत्तरं शतम् ॥५५॥गुरुवायुपुरेशस्य सर्वसिद्धिविधायकम् ।कृष्णाष्टमीसमारब्धमासेनैकेन सिद्धिदम् ॥५६॥कृष्णाष्टमीं समारभ्य यावदन्याऽसिताऽष्टमी ।तावत्कालं स्तोत्रमेतत् प्रत्यहं शतशः पठेत् ॥५७॥मातृकापुटितं कृत्वा हित्वाऽऽलस्यं सुमङ्गले ।एकान्तभक्तियुक्तो हि गुरुवायुपुरेश्वरे ॥५८॥जीवन्नेव स भक्ताग्र्यो माधवाधिष्ठितो भवेत् ।तप्तकाञ्चनगौरे हि तच्छरीरे सदा लसन् ॥५९॥गुरुवायुपुराधीशोऽद्भुतानि हि करिष्यति ।अत आवां महेशानि गच्छावः शरणं हि तम् ॥६०॥कारुण्यमूर्तिमीशानं गुरुवायुपुरेश्वरम् ।उड्डामरेशतन्त्रेऽस्मिन् पटले क्षिप्रसाधने ॥६१॥महावैकुण्ठनाथस्य गुरुवायुपुरेशितुः ।अष्टोत्तरशतं नाम्नां सर्वसिद्धिविलासकम् ।अध्यायं सप्तमं पूर्णमवदातं करोत्युमे ॥६२॥इति श्रीगुरुवायुपुरेश्वराष्टोत्तरशतनामस्तोत्ररत्नं सम्पूर्णम् । N/A References : N/A Last Updated : December 23, 2025 Comments | अभिप्राय Comments written here will be public after appropriate moderation. 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