संस्कृत सूची|पूजा विधीः|प्रतिष्ठारत्नम्|
प्रासादशिखर कलश प्रतिष्ठा

प्रासादशिखर कलश प्रतिष्ठा

सर्व पूजा कशा कराव्यात यासंबंधी माहिती आणि तंत्र.


प्रासादशिखर कलश प्रतिष्ठा :--- केवल शिखर की ही प्रतिष्ठा करनी हो तो तदर्थ संक्षिप्त विधि इस प्रकार है । ग्रहयज्ञ, प्रधनदेवता पूजन, होम आदि नियमानुसार हो । मंडप में स्वस्तिक पर शिखरकलश रखकर लौकिक पंचकलश से स्नान करायें । ॐ मनोजूति० प्रतिष्ठा करें । तेल - उद्वर्तन, चंदन आदि से पूजा करें । सूत्रवेष्टन करें । पुण्याहवाचन करें । ॐ घृतं घृतपावान० से घृत, ॐ द्रुपदादिव० से यवमसूरहरिद्रा पिष्ट से उद्वर्तन, उष्णोदक से स्नान, ॐ मूर्धानंदिवो० से वल्मीक मृत्तिका का लेप. ॐ या दिव्याऽ आप० से गंधोदक से  स्नान । पश्चात्‌ स्नानवेदी के चतुष्कोण स्थित चार कलश से स्नपन - ॐ मानस्तोके० ॐ विष्णोरराटमसि० ॐ वय सोम० ॐ विश्वतश्चक्षु० पश्चात ॐ पय: पृथिव्यां० से शुद्धोदक से स्नान । ॐ नमो भगवते वासुदेवाय - से पूजन, वस्त्र से आच्छादन ॐ स्वस्तिन इन्द्रो० से उठाकर मंडप - देवालय की प्रदक्षिणा कर के पश्चिम द्वार से प्रवेश करायें । देव समीप भद्रासन पर रखकर पुन: पूजा करें - ॐ विश्वतश्चक्षु० मंत्र बोलकर षडंगन्यास से सकलीकरण करें ।

होम :--- घृत, दधि, क्षीर, मधु चारों से पृथक, पृथक ॐ त्रयंबकं यजामहे० से १०८ आहुति देकर शांतिकलश में संस्रव डालकर उस जल से कलश के मूल, नाभि, हृदय, नेत्र और शीर्ष का स्पर्श करें । गंधादि से पूजा करें । ॐ आजिघ्रकलशं० से उठाकर शिखर पर प्रतिष्ठित करें । शिवप्रतिष्ठा में सुवर्ण वा ताम्र का त्रिशूल विष्णुप्रतिष्ठा में चक्र, सूर्य, लक्ष्मी, ब्रम्हा प्रतिष्ठा में कमल इत्यादि कलश में रखें । कहीं कहीं कलश के पास स्तंभ, ध्वजदंड रखतें हैं । पश्वात प्रासाद के सामने खडे रह कर प्रासाद को देवरूप मानते हुए प्रासाद का ध्यान करें ।

गौरी के नाममंत्र से न्यास :--- ॐ घं गौर्यै० ह्रदये । ॐ हं गौर्यै० शिरसे स्वाहा । ॐ यं गौर्यै० शिखायै वष्ट । ॐ भं गौर्यै० कवचाय हुम्‌ । ॐ फं गौर्यै० नेत्राभ्यां वौष‍ट । ॐ हुं गौर्यै० अस्त्राय फट । लक्ष्मी के नाममंत्र से न्यास - ॐ घं लक्ष्म्यै हृदये । ॐ हं लक्ष्म्यै० कवचाय हुम्‌ । ॐ फं लक्ष्म्यै० नेत्राभ्यां वौषट । ॐ हुं लक्ष्म्यै० अस्त्राय फट्‌ । एक मत से न्यास पश्चात्‌ तत्त्वत्रय मूर्ति एवं  मूर्तिपति का पूर्ववत्‌ न्यास करें । ॐ हां श्रीं हरां क्ष: परब्रम्हाणे सर्वाधाराय नम: । ॐ हरां श्रीं हरीं दिव्यतेजोधारिण्यै सुभगायै नम: । ये दो मंत्रों से अधिवासन करें ।

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Last Updated : May 24, 2018

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