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साँवरिया अरज मीरा की ...

वियोग - साँवरिया अरज मीरा की ...

भगवद्वियोगकी पीडाका चित्रण ’वियोग’ शीर्षकके अंतर्गत पदोंमें है ।


साँवरिया अरज मीरा की सुण रे ।

मैं नुगरी म्हारो सुगरो साँवरियो, ओगुण गारी रा कुणरे ॥१॥

राणा विष का प्याला भेज्या, नित चरणामृत को पण रे ।

तारण वारो म्हारो स्याम धणी है, मारण वारो कुण रे ॥२॥

निस दिन बैठी पंथ निहारुँ, व्याकुल भयो म्हारो मन रे ।

म्हारे तो दिल में ऐसी भावे, जाय बसूँ माधोवन रे ॥३॥

निस दिन मोहे विरह सतावे, लकड़ी में लाग्यो घुण रे ।

जैसे जल बिन मछली तड़पे, वैसे ही म्हारो मन रे ॥४॥

राम समा म्हारो श्याम विराजे, जाँ पे वारुँ तन-मन रे ।

मीरा के प्रभु गिरिधर मिलिया, ओराँने ध्यावे कुण रे ॥५॥

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Last Updated : January 30, 2018

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