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अर्घ्य स्थापन

कालीतंत्र - अर्घ्य स्थापन

तंत्रशास्त्रातील अतिउच्च तंत्र म्हणून काली तंत्राला अतिशय महत्व आहे.


अर्घ्य स्थापन

ध्यान द्वारा मानस पूजा करने के बाद निम्नलिखित विधि से अर्घ्य स्थापित करके सबसे पहले अपने बाएं भाग में पृथ्वी पर हूं कार गर्भित त्रिकोण लिख कर, उस पर अर्घ्यपात्र को स्थापित कर शुद्ध जल से भरे । तदुपरान्त उसमें गंधादि छोडकर ॐ गङ्ने च० आदि मंत्र से उसमें तीर्थीं का आवाहन करे । ततश्च...

मं वह्नि मण्डलाय दशकलात्मने नमः बोलकर आधार की तथा
अं सूर्य मण्डलायद्वादश कलात्मने नमः बोलकर शंख की स्थापना करे । ततश्च
ॐ सोम मण्डलाय षोडश कलात्मने नमः कहकर जल का पूजन करे । तत्पश्चात...

ॐ ह्मं ह्नदयाय नमः । ॐ ह्नीं शिरसे स्वाहा । ॐ ह्रूं शिखायै वषट् ।
ॐ ह्नैं कवचाय हुम् मंत्रों से क्रमशः अग्नि, ईशान, नैऋत्य तथा वायव्य कोणों में पूजन केर । अब मध्य भाग में...

ॐ ह्नौं नेत्र त्रयाय वौषट् बोलकर तथा चारों दिशाओं में ब
ॐ ह्नः अस्त्राय फट् बोलकर अभ्यर्चन करे ।

फिर मत्स्यमुद्रा से आच्छादन कर, मूल मंत्र का १० बार जप करे । तत्पश्चात धेनुमुद्रा द्वारा अमृतीकरण करके अस्त्र द्वारा संरक्षण करते हुए भूतिनी तथा योनि मुद्राओं का प्रदर्शन कर रखे हुए जल में से थोडा-सा जल प्रोक्षणी पात्र में डालकर मूल मंत्र द्वारा उस जल से अपने शरीर एवं पूजा के उपकरणों को शुद्ध करने के बाद पीठ-पूजा करे ।


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Last Updated : December 28, 2013

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