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जत
Meanings: 9; in Dictionaries: 5
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एकामतीं एकाजतीं
Meanings: 1; in Dictionaries: 1
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उपाज्
Meanings: 1; in Dictionaries: 1
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पळणारास एक वट शोधणारास दहा वाटा
Meanings: 1; in Dictionaries: 1
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पळणारास एक वट शोधणारास बारा वाटा
Meanings: 1; in Dictionaries: 1
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उटज
Meanings: 9; in Dictionaries: 5
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भजन - कोइ दिन जीवै तौ कर गुजरान...
हरिभक्त कवियोंकी भक्तिपूर्ण रचनाओंसे जगत्को सुख-शांती एवं आनंदकी प्राप्ति होती है।
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दिनेशकुमार शुक्ल - झुळझुळणार्या हवेचा पदर घ...
अनुवादित एकविसाव्या शतकात मानवाच्या वाट्याला आलेले एकाकीपण कित्येक कवींनी त्यांच्या एकेका कवितेने भरून काढले.
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अर्थालंकार - प्रतीप
काव्यास ज्याच्या योगाने शोभा येते त्यास अलंकार असे म्हणतात.
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भुज्
Meanings: 41; in Dictionaries: 4
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मुमुक्षूंस उपदेश - अभंग ५६६ ते ५७५
श्रीज्ञानेश्वर महाराजांची गाथा म्हणजे विठ्ठल प्राप्तीचा एक सोपा मार्ग. यात विठ्ठ्लाच्या सगुणनिर्गुण रूपाचे मोहक वर्णन केलेले आहे.
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हिन्दी पदावली - पद १४१ से १५०
संत नामदेवजी मराठी संत होते हुए भी, उन्होंने हिन्दी भाषामें सरल अभंग रचना की ।
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अवतारवाणी - भजन संग्रह ३३
संपूर्ण अवतारवाणी या पवित्र काव्यात्मक ग्रंथरूपी भजनांची रचना शेहनशाह सत्गुरू बाबा अवतारसिंहजी महाराजांच्या मुखारविंदातून पंजाबी भाषेत झाली. या दैवी ग्रंथाला अलौकीक लोकप्रियता लाभली.
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खंड ४ - अध्याय २७
मुद्गल पुराणात श्री गणेशाच्या आठ अवतारांचे वर्णन आहे.
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अथ चिरपटजी की सबदी
सिद्धसिद्धान्तपद्धतिः हा ग्रंथ गोरक्षनाथांनी हठ योगावर लिहीला आहे. The Siddha Siddhanta Paddhati is a very early extant Hatha Yoga Sanskrit text attributed to Gorakshanath.
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बालकाण्ड - दोहा १ से १०
गोस्वामी तुलसीदासने रामचरितमानस ग्रन्थकी रचना दो वर्ष , सात महीने , छ्ब्बीस दिनमें पूरी की । संवत् १६३३ के मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष में रामविवाहके दिन सातों काण्ड पूर्ण हो गये।
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पांडवप्रताप - अध्याय ५० वा
पांडवप्रताप ग्रंथवाचन म्हणजे चंचल मनाला भक्तियोगाकडे वळविण्याचा प्रवास.
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पांडवप्रताप - अध्याय ५६ वा
पांडवप्रताप ग्रंथवाचन म्हणजे चंचल मनाला भक्तियोगाकडे वळविण्याचा प्रवास.
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पांडवप्रताप - अध्याय ४४ वा
पांडवप्रताप ग्रंथवाचन म्हणजे चंचल मनाला भक्तियोगाकडे वळविण्याचा प्रवास.
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सूरह - अल् आअराफ
कुराणात जीवनाचे असे सत्याधिष्टित नियम दिले आहेत की, ज्यांना आचरणात आणल्याने आपण आपल्या वैयक्तिक, सामाजिक जीवनात तसेच आपला देश व समस्त जगात शाती आणि सुख-समृद्धीचे नंदनवन बनवू शकतो.
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