अभिलाषा - मुझे है काम ईश्वरसे ज...

’अभिलाषा’के अंतर्गत भगवत्प्रेमी संतोंकी सुमधुर कल्याणमयी कामनाओंका दिग्दर्शन करानेवाले पदोंकी छटा भाव-दृष्टिके सामने आती है ।


मुझे है काम ईश्वरसे जगत रुठे तो रुठन दे ॥टेर॥

कुटुम्ब परिवार सुत-दारा, माल धन लाज लोकन की

प्रभु का भजन करनेमें, अगर छूटे तो छूटन दे ॥१॥

बैठ संगतमें संतन की, करुँ कल्याण मैं अपना ।

लोक दुनिया के भोगों में, मौज लूटे तो लूटन दे ॥२॥

प्रभु के ध्यान करनेसे, लगी दिल में लगन मेरे ।

प्रीत संसार विषयों से अगर टूटे तो टूटन दे ॥३॥

धरी सिर पाप की मटकी, मेरे गुरुदेव ने पटकी ।

वो ब्रह्मानन्द ने पटकी, अगर फूटे तो फूटन दे ॥४॥

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Last Updated : January 22, 2014

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