भजन - स्याम दृगनकी चोट बुरी री ...

हरिभक्त कवियोंकी भक्तिपूर्ण रचनाओंसे जगत्‌को सुख-शांती एवं आनंदकी प्राप्ति होती है।


स्याम दृगनकी चोट बुरी री ।

ज्यों ज्यों नाम लेति तू वाकौ, मो घायलपै नौन पुरी री ॥१॥

ना जानौं अब सुध-बुध मेरी, कौन बिपिनमें जाय दुरी री ।

नारायन नहिं छूटत सजनी, जाकी जासों प्रीति जुरी री ॥२॥

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Last Updated : December 24, 2007

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