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प्रिय—मेध m. m. (
प्रिय॑-) N. of a ऋषि (a descendant of अङ्गिरस् and author of the hymns, [RV. viii, 1-40, 57, 58, 76; ix, 28] ) and (pl. ) of his descendants, [RV.] ; [Nir.]
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of a descendant of अज-मीढ, [BhP.]
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प्रियमेध (आंगिरस) n. एक वैदिक सूक्तद्रष्टा [ऋ.८.२.१-४०,६८,६९, ८७,९.२८] । ऋग्वेद में इसके परिवार के लोगों का निर्देश ‘प्रियमेधाह’ नाम से किया गया है [ऋ.१.४५.४] । प्रियमेध ब्राह्मण अजमीढ वंश में उत्पन्न माने जाते हैं [भा.९.२१.२१] । इसके वंश में पैदा हुए ‘प्रियमेध’ नामक ऋषियों ने आत्रेय उद्मय राजा के लिये यज्ञ किया था [ऐ.ब्रा.८.२२] ; प्रैयमेध देखिये । इसके द्वारा रचि सूक्तों में अतिथिग्वपुत्र इंद्रोत, आश्वमेध और ऋक्षपुत्र राजाओं का उल्लेख आश्रयदाता के रुप में किया गया है [ऋ.८.६८.१५-१९] । इइसका संरक्षण अश्विनीयों ने भी किया था [ऋ.८.५.२५] । ओल्डेनवर्ग के अनुसार, जिन सूक्तों के प्रणयन का श्रेय इसे ऋग्वेद में दिया गया है, वे इसके द्वारा रचित नहीं हो सकते [ओल्डेन,त्सी, गे. ४२.२१७] ।
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noun एक ऋषि
Ex. प्रियमेध का वर्णन पुराणों में मिलता है ।
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