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पु. पिता ; बाप . करुनि जनक मागां धांवतां वेग गांठी । - मुरामा ६ . २९९ . [ सं . ] - वि . उत्पन्न करणारा ; कारक . समासांत - हास्य - प्रीति - मृत्यु - अनिष्ट - कल्याण - जनक . जनकपिता - पु . जन्म देणारा बाप . याचे उलट दत्तक घेतो तो पिता . जनणें - अक्रि . प्रसवणें ; विणें ; जन्म देणें . [ सं . जन = जन्मणें ]
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ना. जन्मदाता , तात , पिता , पिताश्री , बाप , बाबा , वडील .
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a Creative; a causer.
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जनक n. निमि या विदेहवंश का कुलनाम । इनकी वंशावलि भी पुराणों में कई स्थानों पर मिलती है । [ब्रह्मांड, ३.६४] ;[वायु. ८९] ;[भा.९. १३] ;[विष्णु ४.४] ;[गरुड.१.१३८] । सूर्यवंशीय इक्ष्वाकुपुत्र निमि से निकली हुई यह एक वंशशाखा है । यह वंशावलि अनेक स्थानों पर मिलती है, फिर भी उनमें साम्य नहीं है । विशेषतः भागवत आदि पुराणों में कुछ व्यक्ति अधिक जोड दिये गये हैं । विदेहवंश का द्वितीय पुरुष मिथिजनक था । इसीने मिथिलानगरी स्थापित की । इसीसे ‘जनक’ यह सामान्यनाम चल पडा । जनक नाम से इस वंश के लोगों का उल्लेख करने की रीति है [श. ब्रा.११.३.१.२, ४.३.२०,६.२.१] ;[वृ.उ.३.१.१, ४.१.१, २.१] ;[जै. ब्रा.१.१९.२] ;[कौ. उ.४.१] । याज्ञवल्क्य वाजसनेय तथा श्वेतकेतु आरुणेय से इसकी अनेक विषयों पर चर्चा हुई थी । वैदिक वाङ्मय में भी ब्रह्मवेत्ता के रुप में, महापुरुष का स्थान इसे प्राप्त है [तै. ब्रा.३.१०.९.९] । इसने सप्तरात्र नामक याग किया [सां. श्रौ. १६.२.७.७] । (भरद्वाज देखिये) । यह याज्ञवल्क्य क समकालीन था । उस समय इसका नाम दैवराति था । वंशावलि के अनुसार, राम का श्वसुर सीरध्वज जनक से, यह जनक कई पीढियों बाद का है ।
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