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अभिमन्यु n. (सो. कुरु.) अर्जुन का पुत्र । यह सोमपुत्र वर्चा के अंश से सुभद्रा के उदर में आया । जन्मतः यह निर्भय, भय उत्पन्न करनेवाला तथा महाक्रोधी प्रतीत होने के कारण, इसका नाम अभिमन्यु रखा गया [म.आ. २१३] । दैत्यों के त्रास से भयभीत पृथ्वी को निर्भय करने के लिये, ब्रह्मदेव ने सब देवताओं को, अंशरुप से पृथ्वी पर जन्म लेने के लिये कहा । उस समय सोम ने देवकार्य के लिये अपने पुत्र को पृथ्वी पर भेजा । परंतु वर्चा इसका अत्यंत प्रिय होने के कारण, यह अधिक दिनों तक पृथ्वी पर नही रहेगा, केवल सोलह वर्ष ही रहेगा, ऐसा सोम ने सब देवताओं से वचन लिया था । इसीसे इसे सोलह वर्ष की आयु में मृत्यु प्राप्त हुई [म.आ.६१.८६.परि.१.४२] ।
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अभिमन्यु n. अभिमन्यु की अस्त्रशिक्षा तथा अन्य युद्धकलाशिक्षा, अर्जुन की खास देखरेख में हुई थी । यह अस्त्रविद्या में इतना प्रवीण था कि, इसके हस्तचापल्य से तथा अस्त्रयोजना नैपुण्य से संतुष्ट हो कर, बलराम ने इसे रौद्र नामक धनुष दिया । यह अत्यंत पराक्रमी था तथा अपने पराक्रम के बल पर, अल्पवयीन होते हुए भी यह महारथी बना ।
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अभिमन्यु n. भारतीय युद्ध में, द्रोण ने बडी फुशलता से अर्जुन को अन्य पांडवों से विलग किया था उसे सेना के बाहर, संशप्तक की ओर संलग्न कर दिया । तदनंतर द्रोण ने भीमादि तीनों को युद्ध में व्यस्त किया । इस प्रकार, पांडव तथा अभिमन्यु को अपनीं सेना समवेत युद्ध में मग्न देख कर, युधिष्ठिर चिन्ताग्रस्त हो गया । युधिष्ठिर को चिन्ताग्रस्त देख कर, अभिमन्यु ने उसे चिन्ता का कारण पूछा । उसपर युधिष्ठिर ने कहा कि, चक्रव्यूह का भेद करने वाला अपनी सेना में कोई न होने के कारण, मै चिन्ता कर रहा हूँ । यह सुनते ही, अभिमन्यु ने भीम की सहायता से, चक्रव्यूह का भेद करने का काम स्वीकार किया । चक्रव्यूह में प्रवेश करने की विधि ही केवल अभिमृत्यु को ज्ञात थी । फिर भी वह घबराया । तदनंतर युधिष्ठिर का आशिर्वाद ले कर, अमिमन्यु भीम के साथ व्यूहद्वार के पास आया ।
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अभिमन्यु n. उस स्थान पर, द्रोणाचार्य ससैन्य व्यूह की रक्षा कर रहे थे । परंतु अभिमन्यु सेना की पंक्तियॉं तोड कर, व्यूह में प्रविष्ट हो गया । व्यूह में घुसने के पश्चात् अभिमन्यू ने, बडे बडे सेनापतियों को अपने शौर्य से भगाया । अपनी सेना को, पीछे हटते देख कर, द्रोणाचार्य सेना सहित अभिमन्यु पर धावा करने आया परंतु आक्रमक को चकमा दे कर, इसने अश्मक राजा का तथा शल्य के बंधु का वध किया । तब कर्ण उस पर आक्रमण करने दौडा । परंतु उसे भी इसने जर्जर कर दिया । इस प्रकार युद्ध करते, अभिमन्यू भीमादिकों सें काफी दूर चला गया । अभिमन्यू को अकेला देख कर, दुःशासन उसकी ओर दौडा । परंतु उसे भी रण से भगा कर, अभिमन्यू इतनी दूर तक चला गया कि, भीमादिकों को वह दिखता ही न था । भीमादिक सरलता से अपने पास आ सकें, इसके लिये इसने मार्ग खुला रखा था परंतु जयद्रथ रुद्रवर के प्रभाव से, भीमादिक को रोक रखा तथा अभिमन्यु तक जाने नही दिया ।
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