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कालिय [kāliya] Relating to time, timely.
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कालिय n. यह काद्रवेयकुल के पन्नग जाति का नाग था [भा.१०.१७.४] ;[म.आ.३१.६] ;[स. ५३.१५-१६] । यह पहले रमणकद्वीप में था । गरुड त्रस्त न करें , इसलिये हर माह में पौर्णिमा को, यह उसको भक्ष्य पहुँचा देता था । एक बार इसने गरुड का भाग भक्षण कर लिया । गरुड ने क्रुद्ध हो कर इसे मारा । किंतु एक प्रहार लागते ही, यह यमुना में जा कर छिप गया । सौभरि के शाप के कारण, गरुड वहॉं न आ सकता था । कालिये के कारण वहॉं का पानी विषमय बन गया । उसे प्राशन करने के कारण, गोप तथा गौओं की मृत्यु हो गई । तब एक वृक्ष पर चढ कर, कृष्ण ने यमुना के जलाशय में छलांग लगाई । कालिय को वहॉं से रमणकद्वीप की ओर भगा दिया, तथा गरुड द्वारा संत्रस्त न होने का प्रबंध किया । इसे पांच मुखे थे, तथा यह बडे ही ऐश्वर्य से रहता था [भा.१०.१६] ;[ह. वं. २.१२] ;[विष्णु.५.७] ।
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-यः The Kaliyuga.
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कालियः [kāliyḥ] N. N. of a tremendously large serpent who dwelt at the bottom of the Yamunā (which was a ground forbidden to Garuḍa, the enemy of serpents, owing to the curse of the sage Saubhari). He was crushed to death by Kṛiṣṇa when he was but a boy; [R.6.49;] [Śi.17.69.]
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