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व्रत

See also :
VRATA
ना.  पण , प्रतिज्ञा , बाणा ब्रीद , स्वतः केलेला नेम ( धार्मिक );
ना.  धर्मविहित आचरण , निष्ठापूर्वक आचरण .
Any self-imposed religious observance or obligation to hold it; a course imposed of works or sufferings; or a vow made to do or bear. मासव्रत An observance occupying a month: वर्षव्रत....a year.
 न. १ स्वतःला लावून घेतलेला एखादा धार्मिक नियम , नेम ; देहदंडाचा एक मार्ग . - ह ८ . १० . ( क्रि० घेणें . ) २ असा नेम पाळण्याची केलेली प्रतिज्ञा , पण . ३ ब्रीद ; प्रतिज्ञा ; बाणा . नतावनधृतव्रत ज्वलन तूंचि बा धावनीं । - केका ६ . [ सं . ] ( वाप्र ) तीळ खाऊन व्रत मोडणें - अगदीं क्षुल्लक कारणासाठीं , फायद्यासाठीं बाणा , नेम सोडणें . सामाशब्द -
०बंध  पु. मुंज ; यज्ञोपवीत धारण करणें . हें एक प्रकारचें व्रतच आहे . [ सं . ]
०भिक्षा  स्त्री. व्रतबंधाच्या आनुषंगिक कर्मापैकीं एक ; भिक्षा मागणें . [ सं . ]
०वैकल्य  न. १ व्रताची अपूर्णता ; त्यांतील न्यूनता , कमीपणा . २ लहानसहान व्रतें , नेम इ० व्रत अर्थ १ पहा .
०संग्रह  पु. व्रत घेणें ; व्रतस्थ असणें . व्रतस्थ , व्रती - वि . १ व्रत पाळीत असलेला ; व्रताप्रमाणें कांहीं नेम करणारा . २ स्त्रीसंग न करणारा ; ब्रह्मचर्य पाळणारा . अमृतराव सात वर्षाचा असतांना त्याची आई स्वर्गवासी झाली ; तेव्हांपासून बापूसाहेब व्रतस्थ होते . - मौनयौवना .
n.  (स्वा. उत्तान.) एक राजा, जो चाक्षुष मनु के पुत्रों में से एक था । इसकी माता का नाम नड्वला था [भा. ४.१३.१६]
  A religious observance. A vow.

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व्रत   व्रत   व्रत-व्रत असणें   (गो.) तीळु खावुनु व्रत भ्रष्‍ट   क्षात्रधर्म-व्रत   चार महिने झोपेंचें व्रत केले, गुण नाहीं दिला देवानें   तीळ खाऊन व्रत मोडणें   बृहन्नडेप्रमाणें नेमस्तपणाचें व्रत   व्रत II.   (गो.) तीळु खावुनु व्रत भ्रष्‍ट   क्षात्रधर्म-व्रत   चार महिने झोपेंचें व्रत केले, गुण नाहीं दिला देवानें   तीळ खाऊन व्रत मोडणें   बृहन्नडेप्रमाणें नेमस्तपणाचें व्रत   व्रत II.   व्रत-व्रत असणें   क्षात्रधर्म-व्रत   (गो.) तीळु खावुनु व्रत भ्रष्‍ट   चार महिने झोपेंचें व्रत केले, गुण नाहीं दिला देवानें   तीळ खाऊन व्रत मोडणें   बृहन्नडेप्रमाणें नेमस्तपणाचें व्रत   व्रत II.   व्रत-व्रत असणें   अधिमासव्रत   प्रियव्रत   सुव्रत   
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  • अधिमासव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • अधिमासव्रत - प्रस्तावना
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • अधिमासव्रत - अधिमासव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
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    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • अधिमासव्रत - अधिमासीयार्चव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • श्री अनन्त व्रत
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • अनन्त व्रत कथा माहात्म्य
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • व्रत पूजन की सामग्री
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • व्रत का विधान
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • श्री अनन्त व्रत कथा
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • रेवा कीर्तन
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • स्तुति श्रीनाथजी की
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • अन्य व्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति, तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है और अंतरात्मा शुद्ध होती है ।
  • मौनव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • शत्रुनाशकव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • लक्षपूजाव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • लक्षतुलसीदलार्पणव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • लक्षप्रमामव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • लक्षप्रदक्षिणाव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • लक्षवर्तिप्रदानव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
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