ऋज्राश्व

n.  अंबरीष, सुराधस, सहदेव तथा भयमान के साथ इसका एक वार्षागिर के रुप में उल्लेख है [ऋ.१.१००.१३-१७] । इन्हीं पंच भ्राताओं के नाम पर उपरोक्त संपूर्ण सूक्त है । एक बार अश्वियों का वाहन गर्दभ लोमडी के रुप में इसके पास आया । तब इसने उसे एक सौ एक भेडें खाने के लिये दीं । तब नगरवासी लोगों की हानि की । इसलिये वृषागिर राजा ने इसकी ऑखें फोड दीं । तब ऋज्राश्व ने अश्विदेवों की स्तुति करने पर उन्होंने इसे दृष्टि दी । उस लोमडी का भाषण भी ऋग्वेद में निम्नप्रकार दिया है । ‘हे पराक्रमी तथा शूर अश्वियों, इस ऋज्राश्व ने तरुण तथा कामी पुरुष के अनुसार एक सौ एक भेडें काट कर मुझे खाने के लिये दी हैं’ [ऋ.१.११६.१६, ११७.१७-१८]

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