नरकवर्गः - श्लोक ५११ ते ५१७

अमरकोश में संज्ञा और उसके लिंगभेद का अनुशासन या शिक्षा है। अन्य संस्कृत कोशों की भांति अमरकोश भी छंदोबद्ध रचना है।


५११ - स्यान्नारकस्तु नरको निरयो दुर्गतिः स्त्रियाम्

५१२ - तद्भेदास्तपनाऽवीचिमहारौरवरौरवाः

५१३ - संघातः कालसूत्रं चेत्याद्याः सत्त्वास्तु नारकाः

५१४ - प्रेता वैतरणी सिन्धुः स्यादलक्ष्मीस्तु निर्‍ऋतिः

५१५ - विष्टिराजूः कारणा तु यातना तीव्रवेदना

५१६ - पीडा बाधा व्यथा दुःखमामनस्यं प्रसूतिजम्

५१७ - स्यात्कष्टं कृच्छ्रमाभीलं त्रिष्वेषां भेद्यगामि यत्

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Last Updated : March 30, 2010

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