भजन - ब्रजबासीतें हरिकी सोभा ...

हरिभक्त कवियोंकी भक्तिपूर्ण रचनाओंसे जगत्‌को सुख-शांती एवं आनंदकी प्राप्ति होती है।


ब्रजबासीतें हरिकी सोभा ।

बैन अधर छबि भये त्रिभंगी, सो वा ब्रजकी गोभा ॥

ब्रज बन धातु बिचित्र मनोहर, गुंज पुंज अति सोहैं ।

ब्रजमोरनिको पंख सीसपर ब्रज जुवती मन मोहैं ॥

ब्रज-रजनीकी लगति अलकपै, ब्रजद्रुम फल अरु माल ।

ब्रज गउवनके पीछे आछे, आवत मद गज चाल ॥

बीच लाल ब्रजचंद सुहाये, चहूँ ओर ब्रज गोप ।

नागरिया परमेसुरहूकी ब्रज तें बाढ़ी ओप ॥

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Last Updated : December 22, 2007

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