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चल चल रे सुआ तेरे आदराज ,...

भजन - चल चल रे सुआ तेरे आदराज ,...

हरिभक्त कवियोंकी भक्तिपूर्ण रचनाओंसे जगत्‌को सुख-शांती एवं आनंदकी प्राप्ति होती है।


चल चल रे सुआ तेरे आदराज, पिंजरामें बैठा कौन लाज ?

बिल्लीका दुख दहै जोर, मारै पिंजरा तोर-तोर ॥

मरने पहले मरो धीर, जो पाछे मुक्ता सहज छीर ।

सतगुरु-सब्द ह्रदैमें धार, सहजाँ-सहजाँ करो उचार ॥

प्रेम-प्रवाह धसै जब आभ, नाद प्रकासै परम लाभ ।

फिर गिरह बसाओ गगन जाय, जहँ बिल्ली मृत्यु न पहुँचै आय ॥

आम फलै जहँ रस अनन्त, जहँ सुखमें पाओ परम तन्त ।

झिरमिर-झिरमिर बरसै नूर, बिन कर बाजै तालतूर ॥

जग दरिया आनन्द पूर, जहँ बिरला पहुँचै भाग भूर ।

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Last Updated : December 25, 2007

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