विश्वकर्मप्रकाश - विषयानुक्रमणिका

देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।


१ - मंगलाचरण - अध्याय १ - श्लोक १ से ८

२ - वास्तुपुरूष पूजन - अध्याय १ - श्लोक ९ से २३

३ - भूमिलक्षण - अध्याय १ - श्लोक २४ से ३९

४ - भूमिफल - अध्याय १ - श्लोक ४० से ७१

५ - शकुन फल - अध्याय १ श्लोक ७१ से ८२

६ - खननविधी - अध्याय १ - श्लोक ८३ से १२८

७ - स्वप्नविधी - अध्याय २ - श्लोक १ से १३

८ - दिशाफल - अध्याय २ - श्लोक १४ से १६

९ - समयशुद्धी - अध्याय २ - श्लोक १७ से ५०

१० - ध्वजफल - अध्याय २- श्लोक ५१ से ६१

११ - आयव्ययफल - अध्याय २ - श्लोक ६२ से ९३

१२ - देवादीक स्थान निर्णय - अध्याय २ - श्लोक ९४ से १०२

१३ - धृवादिगृहभेद - अध्याय २ - श्लोक १०३ से १६१

१४ - द्वारमान - अध्याय २ - श्लोक १६३ से १६७

१५ - स्तंभप्रमाण - अध्याय २ - श्लोक १६८ से १७०

१६ - गृहशाला निर्णय - अध्याय २ - श्लोक १७१ से १९७

१७ - गृहारंभकाल - अध्याय ३ - श्लोक १ से २१

१८ - गृहारंभ - अध्याय ३ - श्लोक २१ से ७०

१९ - शय्यामंदिर भवन - अध्याय ४ - श्लोक १ से २५

२० - पादुकामान लक्षण - अध्याय ४ - श्लोक २६ से ३३

२१ - शंकुशिलान्यास - अध्याय ४ - श्लोक ३४ से ६२

२२ - वस्तुदेहलक्षण बलिदान - अध्याय ५ - श्लोक १ से ३६

२३ - शिलान्यास पूजन - अध्याय ५ - श्लोक ३७ से २६२

२४ - प्रासादविधान - अध्याय ६ - श्लोक १ से १४

२५ - शिलान्यास विशेष - अध्याय ६ - श्लोक १५ से ६१

२६ - प्रासादनिर्णय - अध्याय ६ - श्लोक ६२ से १०९

२७ - पीठिकालक्षण - अध्याय ६ - श्लोक ११० से ११२

२८ - मंडपलक्षण - अध्याय ६ - श्लोक ११३ से १३६

२९ - द्वारलक्षण - अध्याय ७ - श्लोक १ से ११३

३० - पुष्कर उद्यान मंडप - अध्याय ८ - श्लोक १ से ३२

३१ - वृक्ष छेदन विधी - अध्याय ९ - श्लोक १ से ४८

३२ - गृहप्रवेश निर्णय - अध्याय १० - श्लोक १ से ८

३३ - गृहप्रवेशकालशुद्धी - अध्याय १० - श्लोक ९ से ४५

३४ - शय्याशयन लक्षण - अध्याय १० - श्लोक ४६ से ८९

३५ - कलशचक्र प्रवेश - अध्याय १० - श्लोक ९० से १०५

३६ - दुर्गवास्तु पूजन - अध्याय ११ - श्लोक १ से ५९

३७ - शल्यज्ञान - अध्याय १२ - श्लोक १ से ७९

३८ - राजगृहनिर्णय - अध्याय १३ - श्लोक १ से ११०

३० - ग्रंथफलश्रुतिनिरूपण - अध्याय १३ - श्लोक १११ से ११२

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Last Updated : January 20, 2012

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