श्री विजयादुर्गेचें पद

श्रीसद्गुरु कृष्ण जगन्नाथ भट्ट बांदकरमहाराज.


श्री विजयादुर्गेचें पद
हरुनि अपजया जोडिसि विजया, ह्मणुनि ह्मणति तुज विजया ग ॥धृ०॥
दुष्ट असुरजन वधिले येउनि, अष्ट भुजी तूं उदया ॥ह०॥१॥
इष्टदेवि संकट वारुनि मज, तुष्टविसी चिर हृदया ग ॥ह०॥२॥
वैष्णव कृष्ण जगन्नाथावरि, पूर्णपणें करि स्व दया ग ॥ह०॥३॥

Translation - भाषांतर
N/A

References : N/A
Last Updated : 2017-03-10T01:11:09.9130000