शंकराची आरती - कुलदैवत तूं मेरी सेवक मै ...

देवीदेवतांची काव्यबद्ध स्तुती म्हणजेच आरती.
The poem composed in praise of God is Aarti.

शंकराची आरती २
कुलदैवत तूं मेरी सेवक मै तेरो ।
सुरनर सेवा करले पायो सुख सारो ॥
दुज्यों पाव तुमारों तनमनधन वारों ।
तुम बिन जाणु न दुज्यों मोकूं तुम भ्यारो ॥ १ ॥

जयजयाजी महादेव प्रभूजी देवनको ।
पंचारती करहों ॥ मैं दास पदरजको ॥ धृ. ॥

उदधिमथनबिखे जब बिख जालन लागो ।
सुरनर ब्रह्मा विष्णू तब सब ले भागो ॥
शरणागतहो तुमपे रच बोलन लागो ।
तवकृपासे गलबिख दूरदे ससि भागॊ ॥ जय. ॥ २ ॥

त्रिपारसुर मारनथे रथ धरती कीन्हो ।
शशिसूरज दो चक्कर घोडे बेद बनो ॥
ब्रह्मा सारथी विष्णू अच्छो शरमान्यो ॥
विधिजाल त्रिपुरन सो करित सब जानो ॥ जय. ॥ ३ ॥

सुख पाई सब सृष्टी आई पूजनकू।
धुप दिप भोग लगाये ठाडे आरतीकूं ।
बेल फूल कमल चढाये रिझायें हर तुमकूं ॥
मनवांछा सुख पायके आये निजपदकूं ॥ जय. ॥ ४ ॥

ऎसे तुम महाराज दयाल दीननके ।
पांचो निरांजन वारो देहनके ॥
बलजाऊं चरनोपर कंथज गिरिजाके ।
दास सदाशिव निश्चळ नाथ रहो तुम वाके ॥ जय. ॥ ५ ॥
Translation - भाषांतर
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Last Updated : 2012-08-30T21:28:25.0800000